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श्रीरामजन्मभूमि

जन्मभूमि मम पुरी सुहावनी | उत्तर दिशि बह सरजू पावनी ||

कनक भवन

अयोध्या स्थित कनक भवन में विराजमान प्रभु श्रीराम और माता सीता का विग्रह नयनाभिराम है |

नागेश्वरनाथ

नागेश्वरनाथ अयोध्याधाम में पुण्यसलिला सरयू के समीप स्थित सुप्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक शिव मंदिर है |इस मंदिर की स्थापना श्रीराम के छोटे सुपुत्र कुश ने कि थी

दीपोत्सव

दीपोत्सव की मूल प्रेरणा भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के पश्चात अयोध्या आगमन से जुड़ी है। जब श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे, तब नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया।यह परंपरा आगे चलकर दीपावली के रूप में स्थापित हुई।शास्त्रों और लोककथाओं के अनुसार, उस दिन सम्पूर्ण अयोध्या दीपों से प्रकाशित हो उठी थी — मानो अंधकार पर प्रकाश की विजय का उत्सव मनाया गया हो। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2017 से प्रतिवर्ष दिव्य भव्य दीपोत्सव का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है

प्रतिष्ठा द्वादशी

प्रभु मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम के अपने नवीन दिव्य भव्य मंदिर के गर्भगृह में प्राण प्रतिष्ठा की तिथि पौष शुक्ल द्वादशी को प्रतिवर्ष प्रतिष्ठा द्वादशी का पर्व पूर्ण हर्षोल्लास से मनाया जाता है |

रामनवमी

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को प्रभु श्रीराम के जन्म के अवसर पर राम नवमी का पर्व मनाया जाता है | नवनिर्मित भव्य राममंदिर में विराजमान रामलला के मस्तक पर भगवान भुवन भास्कर के द्वारा अपराहन 12 बजे तिलक किया जाता है , जो सूर्य तिलक कहा जाता है |

श्रावण मेला/ झूला मेला

अयोध्या में श्रावण मास में समस्त प्रमुख मंदिरों में रामलला सरकार और किशोरी जी के चल विग्रह को झूला झुलाने कि परंपरा है , जिसमे संत / महंत / श्रद्धालु प्रेम से भावविभोर हो नृत्य गायन कर झूला झुलाते हैं |

प्रमुख मंदिर

अयोध्या के प्रमुख प्रसिद्द मंदिरों में छोटी देवकाली , बड़ी देवकाली , अमावा मंदिर , वेद मंदिर , तुलसी चौरा , दसरथ महल , राजद्वार मंदिर , कोटेश्वर महादेव आदि प्रमुख हैं |

घाट

प्रभु राम कि नगरी में नया घाट , राम घाट, झुनकी घाट , राजघाट, ऋणमोचन घाट , गुप्तार घाट प्रमुख दर्शनीय , मनोरम घाटों में शामिल हैं |

कुंड

अवधपुरी के मुख्य कुंड में विभीषण कुंड , निर्मली कुंड, दसरथ कुंड, भरत कुंड, सूर्य कुंड , ब्रम्ह कुंड का विशेष और पौराणिक महत्व है |

किला

लक्ष्मण किला , सुग्रीव किला अयोध्या के मुख्य किलो में शामिल हैं, जिनकी संरचना , ऐतिहासिकता , धार्मिक महत्व अद्वितीय है |

आश्रम

अयोध्या में वैसे तो बहुत से आश्रम हैं परन्तु परमहंस आश्रम , मणिराम दास जी की छावनी , बड़ी छावनी कुछ प्रमुख और प्रसिद्द स्थान हैं |

साकेतपुरी के प्रमुख स्थानों को जोड़ने वाले मार्गों में रामपथ , भक्ति पथ , जन्मभूमि पथ और धर्म पथ की विशेष उपयोगिता और महात्म्य है |

सूर्यकुंड

सूर्यकुंड रघुकुल के कुलदेवता भगवन भुवन भाष्कर सूर्य देव को समर्पित स्थान है , जिसका अयोध्या के इतिहास में विशिष्ट महत्ता है |

गुप्तार घाट

गुप्तार घाट सरयू नदी के तट पर अयोध्या नगर से लगभग 12 किलोमीटर पश्चिम दिशा में स्थित है | ऐसी मान्यता है कि प्रभु मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम अपने प्रियजनों , पुरजनो और प्रजाजनों सहित यही से अपने प्रिय लोक गमन किये थे | यहाँ कार्तिक मास में कल्पवास की विशेष महिमा है |

परिक्रमा मार्ग

शास्त्रों में प्रदक्षिणा की बड़ी महिमा बतायी गयी है-

यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च।तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे ॥

चौरासी कोसी

चौदह कोसी

पंच कोसी

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